ना जाने के लिए आ

ये मौसम, ये बरसात, ये भीगी हुई रात,
इनको अफसाना बनाने के लिए आ।
जैसे तुझे आते है बहाने न आने के,
ऐसे ही बहाने से, ना जाने के लिए आ।

माना मुहब्बत का छुपाना है, मुहब्बत,
चुपके से किसी रोज बताने के लिए आ।
इश्क में बेपरवाही का उसूल भी है,
बेपरवाह मुझमें समाने के लिए आ।।

कुछ हसीन सपने तुने भी देख रखे थे,
सपनो को हकीकत में लाने के लिए आ।
रिश्तों का लिहाज तूने भी रखा था मगर,
मुझसे अपना रिश्ता निभाने के लिए आ।।


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